बकरीपालन करना चाहते हैं? जानिए महत्वपूर्ण बातें
01 November 16:16

बकरीपालन करना चाहते हैं? जानिए महत्वपूर्ण बातें


बकरीपालन करना चाहते हैं? जानिए महत्वपूर्ण बातें

ज्यादातर किसान खेती किसानी के साथ पशुपालन भी करते हैं। गाय, बकरी पालन या मुर्गीपालन को तवज्जो दी जाती है। अगर आप भी बकरी पालन करना चाहते हैं तो इसे शुरु करने से पहले बकरीपालन के बारे में कई महत्वपूर्ण बातें पता होनी चाहिए, जिससे आपका नुकसान टल सकता है।बकरी को गरीबों की गाय से कहा जाता है। बकरी के रखरखाव पर खर्च भी काफी कम होता है। लेकिन आप बड़े पैमाने पर बकरी फार्म बनाने का सोच रहे है तो कई इन बातों का ध्यान रखना होगा।


सही नस्ल का करें चयन

बकरी की नस्ल हैं जिनमें ब्लैक बंगाल, जमुपारी बरबरी, अफ्रिकन बोर, सानेन बीटल, बारबरी, सिरोही आदि शामिल हैं। आप अपने प्रदेश के अनुसार बकरियों की नस्ल का चयन कर सकते हैं।

प्रक्रिया

अगर पर बड़े पैमाने पर बकरी पालन करना चाहते हैं तो पहले आपको बकरियों के लिए बाड़ा बनाना होगा। इसके लिए बकरियों की संख्या के अनुसार लागत लगेगी। वहीं बकरियों के हरे चारे का और पानी भी प्रबंध करना होगा। कई जगहों पर किसान खेती किसानी के साथ बकरी पालन करते हैं लेकिन उन्हें खुले में छोड़ा जाता है। बकरियां खेतों में घुम कर चारा घास खाती है। इसलिए उनके लिए दाना-भूसे आदि का व्यवस्था काफी कम मात्रा में करनी पड़ती है। लेकिन बाड़े में पाली जाने वाली बकरियों के चारे का और पानी का सही प्रबंध करना होता है।


कितनी होती है प्रजनन क्षमता

एक बकरी एक बार में दो से तीन बच्चा देती है और एक साल में दो बार बच्चा देने से इनकी संख्या में वृद्धि होती है। बच्चे को एक वर्ष तक पालने के बाद ही बेचते सकते हैं।


बकरियों में प्रमुख रोग और उनका उपचार

बकरियों में प्राय बरसात के मौसम में मुंहपका, खुरपका, पेट के कीड़ों के साथ-साथ खुजली की बीमारियाँ होती हैं। रोग के लक्षण दिखते ही इन्हें तुरंत पशु डाक्टर से दिखाना चाहिए। कभी-कभी देशी उपचार से भी रोग ठीक हो जाते हैं।


बकरी पालन में क्या सावधानियां बरतें ?

बकरीपालन जंगली क्षेत्र से सटे किया जा रहा है तो खासकर जंगली जानवरों का डर होता है। इसलिए बाड़े में मजबूत जाली लगानी चाहिए। जिससे जानवर अंदर नहीं आ सके।


बकरी पालन में क्या समस्याएं आती है ?


बरसात के मौसम में बकरी की देख-भाल करना सबसे कठिन होता है। क्योंकि बकरी गीले स्थान पर बैठती नहीं है और उसी समय इनमें रोग भी बहुत अधिक होता है।
बकरी का दूध पौष्टिक होने के बावजूद उसमें महक आने के कारण कोई उसे खरीदना नहीं चाहता। इसलिए उसका कोई मूल्य नहीं मिल पाता है।


बकरीपालन के ये हैं फायदे

जरूरत के समय बकरियों को बेचकर आसानी से नकद पैसा प्राप्त किया जा सकता है।
इस व्यवसाय को करने के लिए किसी प्रकार ज्यादा तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता नहीं पड़ती।
यह व्यवसाय बहुत तेजी से फैल रहा है। इसलिए यह व्यवसाय कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाला साबित हुआ है।
बकरियों के लिए स्थानी स्तर पर बाजार उपलब्ध होने से किसानों का ज्यादा भागदौड़ नहीं करनी पड़ती। ज्यादातर व्यापारी गांव आकर बकरियां खरीदते हैं।





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