पराली को जलाएं नहीं, रोजगार का साधन बन सकती है
29 October 15:54

पराली को जलाएं नहीं, रोजगार का साधन बन सकती है


पराली को जलाएं नहीं, रोजगार का साधन बन सकती है

गेहूं कटने के बाद बचे ठूठों और धान की बाली से दाना निकालने के बाद जो अवशेष बचते है उसे पराली या पइरा भी कहते हैं। पराली को जलाने का नया रिवाज शुरू हो गया है। इससे प्रदूषण के साथ ब्लैक कार्बन भी बढ़ता है जो ग्लोबल वार्मिग भी बढ़ाता है। पराली जलाने पर पंजाब और हरियाणा में कई किसानों पर मामले भी दर्ज हुए हैं। इन दो राज्यों के अलावा देश के अन्य राज्य जैसे कि, उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश महाराष्ट्र तथा दक्षिणी राज्यों में पराली बड़े पैमाने पर जलाई जाती है। इससे वायुप्रदूषण बडे पैमाने पर होता है। वहीं पराली जलाने से जमीन और किसान को भी भारी नुकसान होता है। अक्सर जलाई जाने वाली पराली एक रोजगार का साधन भी बन सकती है। पराली पर प्रोसेस कर एेसी कई चीजें बनाई जा सकती है जिसकी बाजार में काफी डिमांड है।


पराली से बना सकते हैं खाद और गैस

पुआल या पराली फायदेमंद भी है। एक टन में 5.50 किलो नाइट्रोजन, 2.3 किलो फॉस्फोरस, 1.30 किलो सल्फर और 25 किलो पोटैशियम होता है। इससे गैस संयत्र भी बन सकता है जिससे खाना बनाना और गाड़ी चलाना संभव है। गैस के अलावा खाद भी बन सकती है, जिसकी बाजार में कीमत 5,000 रुपये प्रति टन है और ऑर्थोसिलिक एसिड भी तैयार होगा। इस तरह केवल जलाकर ही निपटान के प्रति जागरूकता की जरूरत है।

इकोफ्रेंडली चीज बनाने पर से गांव में ही रोजगार

मशीन पर पराली पर प्रोसेस कर आप झाडू, गमले, टोकरी, कुर्सियां, चटाई, गमले, फुलदाणी बना सकते हैं।इससे गांव में ही रोजगार उपबल्बध होगा और आमदनी भी अच्छी होगी। मार्किट में एेसी कई मशीनें उपलब्ध है जिनके सहारे पराली से कई चीजें बनाई जा सकती हैं।




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