एेसे करें चने में फली छेदक कीट (इल्ली) का प्रबंधन
12 November 14:02

एेसे करें चने में फली छेदक कीट (इल्ली) का प्रबंधन


एेसे करें चने में फली छेदक कीट (इल्ली) का प्रबंधन

एेसे करें चने में फली छेदक कीट (इल्ली) का प्रबंधन

चने की फसल को फली छेदक कीट सबसे ज्यादा हानि पहुंचाने वाला कीट है। इसके कारण पैदावार काफी कम होती है। बताया जाता है कि इस कीट से चने को लगभग 40 से 55 प्रतिशत तक नुकसान होता है। फली छेदक कीट एक काफी विनाशकारी कीट है। यह कीट दाल और तिलहनों के अलावा अरहर मटर, कपास, मिर्च मूंगफली ज्वार, टमाटर जैसे अन्य बागवानी फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं।


कैसे होता है संक्रमण ?

चने के अंकुरण के एक पखवाड़े या 20 दिन बाद इस कीट की शुरुआत होती है और कली निकलने के शुरुआत के बाद और उसम में वाले मौसम में कीट ज्यादा नुकसान पहुंचाती है जिससे चने की स्थिति गंभीर हो जाती है। इस कीट मादा अकेले कई छोटे सफेद अंडे रखती है 3-4 दिनों में अंडे से इल्लियाँ निकलती है, कोमला पत्तियों पर थोड़े समय के लिए खाती हैं और बाद में फली पर आक्रमण करते हैं। एक पूर्ण विकसित इल्ली लगभग 34 मिमी लंबे, हरी से भूरे रंग की हो जाती है मिट्टी में चली जाती है मिट्टी में यह प्यूपा बनजाती है|


एेसे करे प्रबंधन

गर्मियों के दिनों में खेत की गहरी जुताई करें। 0.5% जिगरी और 0.1% बोरिक एसीड के साथ HaNVP 100 LE प्रति एकड़ की दर से अंडा सेने की अवस्था पर छिडकाव करे और 15-20 दिनों में दोहराएं। रसायनों के उपयोग में 2.00 मिलीलीटर प्रोपेनोफॉस 50 ईसी प्रति लीटर पानी अंडानाशक के रूप में लेना चाहिए। फेरोमेन ट्रैप का उपयोग करें। यदि संक्रमण अधिक हो तो इंडोक्साकार्ब 14.5% SC 0.5 मिली या स्पिनोसेड 45% SC 0.1 मिली या 2.5 मिली क्लोरोपाईरीफास 20 EC प्रति ली. पानी के अनुसार छिडकाव करें | चारो और भिन्डी और गेंदा सुरक्षा फसल के रूप में लगाए| वहीं पछिंयों के बैठने के लिए दो चार स्थान बनाए जिससे फसल के कीट को पंछी खा सकेंगे इससे भी कीट कम होगा।



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