किताब की प्रमुख विशेषताएं

प्रतिबंधित कीटनाशक


नए बदलावों के साथ केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड की अद्यतन सूची के अनुसार पाबंदी लगाए और लगाए जाने वाले रसायनों की जानकारी।

फसलें और उनके कीट


किताब में लगभग सभी फसलों की सूची दी गई है। इसन फसलों के कीटों की सूची तथा कीटनाशकों के इस्तेमाल की जानकारी पहली बार किसी किताब में उपलब्ध कराई गई है।

किसानों के सवालों को प्रधानता


हजारों किसानों द्वारा पूछे गए सवालों को ध्यान में लेते हुए उनकी जरुरत के अनुसार किताब लिखी गई है।

कीटों का वर्गीकरण


कीटों का वर्गीकरण और कीटनाशकों की (जैसे कीट, खरपतवार, फफूंद) सिफारिश, एमआरएल स्तर, घटक इसकी विस्तार से जानकारी।

रसायनों को लेकर सावधानी


रसायन कितना जहरीला है, पीपीएम द्रावण कैसे बनाएं? लाल-पीला-नीला-हरा ट्रायएंगल चिह्न वाले रसायनों को लेकर क्या सावधानी (safety measures) बरतें इसकी विस्तार से जानकारी। .

उत्कृष्ट किताब


संपूर्ण किताब की आर्ट पेपर पर छपाई , फसलों के कीट तथा मित्र कीटों के उच्च दर्जे के फोटोज। .

240

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द्वैमासिक

कृषिकिंग द्वैमासिक अंक (वर्ष २०१६ -१७)

कृषिरसायने: पिकनिहाय सल्ला व सुरक्षा

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कीटकनाशके वापरताना घ्यावयाची काळजी व वापरण्याच्या पद्धती

फेब्रुवारी - मार्च २०१८

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सरकारी प्रयत्नानंतरही शेतमालात तेजीची शक्यता धुसर?

डिसेंबर २०१७- जानेवारी २०१८

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सिंचन योजना: अनुदान व त्रुटी

ऑक्टोबर – नोव्हेंबर २०१७

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जैविक निविष्ठा: सेंद्रिय शेतीचा आधार की फसवणूक

ऑगस्ट-सप्टेंबर २०१७

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मॉन्सून २०१७: महाराष्ट्रासाठी कृषीहवामान सल्ला

जून-जुलै २०१७

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कसा राहील कृषिमालाचा बाजारभाव

एप्रिल - मे २०१७

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शेतकऱ्यांच्या हक्काची : शेतकरी उत्पादक कंपनी

फेब्रुवारी - मार्च २०१७

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शेती पद्धती- तुलनात्मक अभ्यास

डिसेंबर २०१६ - जानेवारी २०१७

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जी.एम.ओ. शेतकऱ्यांसाठी वरदान की सापळा

नोव्हेंबर २०१६

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यंदा दीड कोटी टन खरीप उत्पादन ?

ऑक्टोबर २०१६

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कृषी पर्यटन व्यवसाय, घरघरीतून बरकतीकडे

सप्टेंबर २०१६

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वाटचाल बाजार स्वातंत्र्याकडे

ऑगस्ट २०१६

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विमा तसा चांगला

जुलै २०१६

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मंदीमुळे बिघडले कांद्याचे अर्थकारण

जून २०१६

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मान्सूनची चाहूल घेताना

मे २०१६

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बीटी कॉटनचा वाद

एप्रिल २०१६

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कृषिरसायन: फसलों की सुरक्षा को लेकर सलाह

किसान कृषि रसायनों के इस्तेमाल को लेकर अब जागृत हुए हैं। रसायनों के इस्तेमाल को लेकर वें लगातार कई सवाल पूछते हैं। विशेषज्ञों द्वारा की गई सिफारिशों के अनुसार कीटनाशकों का सही इस्तेमाल किसान और कृषि उपज की सुरक्षा के लिए जरुरी है। किसान और कृषि उपज की सुरक्षा को ध्यान में लेते हुए कृषिकिंग प्रकाशन द्वारा डाॅ. अंकुश चोरमले ( अनुसंधान सहयोगी, कृषिकीट विज्ञान, राहुरी कृषि विश्वविद्यालय) द्वारा लिखित किताब 'कृषि रसायन : फसलों की सुरक्षा को लेकर सलाह' प्रकाशित की गई है। यह किताब लिखते समय किसानों को महत्वपूर्ण जानकारी मिलनी चाहिए इसका खास ध्यान रखा गया है। इसलिए इस किताब में किसानों को उपयुक्त जानकारी मिलेगी।

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किसानों की राय

'कृषि रसायन' किताब की वजह से कीटनाशकों की लागत कम हुई है। वही कीटनाशकों के छिडकांव को लेकर सही जानकारी इस किताब से मिली। किस कीट के कौन-सा रसायन इस्तेमाल करना है इसकी पूरी जानकारी इस किताब में मिली यह किसानों के लिए काफी उपयोगी है। इस तरह की जानकरी कृषिकिंग की ओर से और मिलनी चाहिए।

face

हरेश सदाशिव चौधरी

ग्राम ममुराबाद, जिला-जलगांव.

'कृषि रसायन' किताब मिलने के बाद मैंने खुद कृषि केंद्र जाकर फसलों की जरुरत के अनुसार आवश्यक कीटनाशक लाए. इससे मेरी टमाटर की फसल काफी फायदा हुआ। मेरे दोस्त के पास यह किताब देखी थी। इसमें दी गई जानकारी काफी अच्छी लगी। इसलिए किताब की दो प्रतियां मंगवाई। किताब में दी गई जानकारी काफी उपयोगी है।

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विनायक अशोक लाड

ग्राम-भोसे, तहसील मंगलवेढ़ा जिला- सोलापुर

'कृषि रसायन; किताब मेरी बैंगन और अंगूर की फसल को काफी फायदेमंद साबित हुई है। आप से और रसायनों के बारे में जानकारी मिलें जिससे अन्य फसलों के कीटनाशकों की लागत कम हो सकती है।

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राहुल रामचंद्र सूर्यवंशी

ग्राम- हेलगाव, तहसील- कराड, जिला-सतारा.

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संपादकीय विभाग

मुख्य संपादक


डाॅ. नरेश शेजवल. एमएस्सी, (बायोकेमिस्ट्री, बंगलुरु यूनिवर्सिटी), पीएचडी ( प्राणिविज्ञान, मुंबई यूनिवर्सिटी) सहयोगी, प्रोफेसर प्राणिविज्ञान विभाग, पुणे यूनिवर्सिटी).

“भरोसेमंद स्त्रोतों से मिली गुणवत्तापूर्ण जानकारी और कृषि क्षेत्र की हाल की स्थिति का अचूक और गहराई से किया जाने वाला विश्लेषण भारतीय कृषि उद्योग और किसानों के विकास के लिए उपयोगी साबित होगा।"
डाॅ. नरेश शेजवल जिज्ञासू अनुसंधानकर्ता, लेखक, विश्लेषक और अध्यापक हैं। उन्हें विभिन्न जैविक विज्ञानों में अनुसंधान का 8 साल का अनुभव रहा है। डाॅ. नरेश किसान परिवार से संबंधित होने से उन्होंने अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग कृषि अनुसंधान विकास के लिए करने का निर्णय लिया है। उन्होंने अनुसंधानकर्ता, कृषि उद्यमियों का किसानों से आसानी संपर्क हो सके एेसी आधुनिकतम प्रणाली का निर्माण किया है। डाॅ. नरेश ने अब तक विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंसों में भाग लेकर अपने अनुसंधानों का प्रेजेंटेशन दिया है। विख्यात अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में 2 शोध प्रबंध प्रकाशित हुए और एक भारतीय एक पेटंट भी दर्ज किया है।

प्रबंधकीय संपादक


श्री निलेश शेजवल, बीई (आईएमई), एमबीए इन मार्केटिंग (आॅस्ट्रिया यूनिवर्सिटी)

““अन्य किसी भी बिजनेस की तरह की खेती के लिए भी नीतियां, सुनिश्चित प्रबंधन और मार्केटिंग कौशल होना चाहिए। हम किसानों को सेवा मुहैया करने के लिए तत्काल विशेषज्ञ उपलब्ध कराते हैं, वहीं उद्योगों को आकर्षित करने के लिए कृषि उद्यम विश्व के माध्यम सेवा के लिए नए मापदंडों का निर्माण कर रहे हैं।”

लेखक


डॉ. अंकुश चोरमुले, M.Sc., Ph.D. (Agri.) कृषि कीट विज्ञान विभाग, महात्मा फुले कृषी विश्वविद्यालय, राहुरी.

डाॅ. अंकुश महात्मा फुले कृषी विद्यापीठ (राहुरी) में कृषी कीटविज्ञान विभाग के तहत' फसलों पर के कीटों का रोग सर्वेक्षण और सलाह' इस प्रोजेक्ट पर अनुसंधान सहयोगी के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने कृषि महाविद्यालय, कोल्हापूर से स्नातकोत्तर उपाधि और कृषि विश्वविद्यालय राहुरी से आचार्य उपाधि अर्जित की है। डाॅ. अंकुश द्वारा लिखे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पंद्रह शोध प्रंबध, दो किताबें और डेढ़ सौ ज्यादा लेख प्रकाशित हुए हैं। कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए उन्हें विभिन्न संस्थाओं द्वारा 'युवा अनुसंधानकर्ता', 'उत्कृष्ट लेखक' और 'महाराष्ट्र विभुषण' पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

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